Notes on Constituent assembly

क्रिप्स मिशन की असफलता के बाद 1946 में तीन सदस्यीय कैबिनेट मिशन (लॉर्ड पैथिक लॉरेंस, सर स्टैफर्ड क्रिप्स और ए.वी. अलेक्जेंडर) को भारत भेजा गया।

कैबिनेट मिशन के एक प्रस्ताव के द्वारा अंततः भारतीय संविधान के निर्माण के लिये एक बुनियादी ढाँचे का प्रारूप स्वीकार कर लिया गया, जिसे 'संविधान सभा' का नाम दिया गया।

प्रत्येक प्रांत, देशी रियासतों व राज्यों के समूह को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें दी जानी थीं। सामान्यतः 10 लाख की जनसंखया पर 1 सीट की व्यवस्था रखी गई।

संवधिान सभा की कुल 389 सीटों में से ब्रिटिश सरकार के प्रत्यक्ष शासन वाले प्रांतों को 296 सीटें तथा देशी रियासतों को 93 सीटें आवंटित की जानी थी।

296 सीटों में 292 सदस्यों का चयन ब्रिटिश भारत के गवर्नरों के अधीन 11 प्रांतों से तथा चार का चयन दिल्ली, अजमेर-मारवाड़ कुर्ग एवं ब्रिटिश बलूचिस्तान के (4 चीफ कमिश्नरी के प्रांतो से) किया जाना था।

प्रत्येक प्रांत की सीटों को तीन प्रमुख समुदायों- मुसलमान, सिख और सामान्य (मुस्लिम और सिख के अलावा) में उनकी जनसंख्या के अनुपात में बाँटा जाना था।

प्रत्येक विधानसभा में प्रत्येक समुदाय के सदस्यों द्वारा अपने प्रतिनिधियों का चुनाव एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से समानुपातिक प्रतिनिधित्व तरीके के मतदान से किया जाना था।

देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का चुनाव रियासतों के प्रमुखों द्वारा किया जाना था।

संविधान सभा हेतु ब्रिटिश भारत के प्रांतो को आवंटित 296 सीटों के लिये जुलाई-1946 में चुनाव हुए।

296 सीटों में से भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस 208 सीटें, मुस्लिम लीग को 73 सीटें एवं 15 सीटें अन्य छोटे समूहों को प्राप्त हुई। संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई।

    प्रथम अधिवेशन में सर्वमान्य रूप से डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया।

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